🌾 गेहूँ की खेती कैसे करें? स्टेप बाय स्टेप संपूर्ण गाइड (2025)

गेहूं की खेती

नमस्कार,

हमारा महत्वपूर्ण आहार रोटी (जोकि गेहूं को पीस कर बनती है) का सेवन हम रोज करते है। उसकी खेती कैसे होती है,कौनसी मिट्टी उपयोगी है आइए इन सभी के बारे में विस्तार से जानते है।

भारत में गेहूँ सबसे ज़्यादा उगाई जाने वाली रबी फसल है। सही तकनीक अपनाने से किसान कम लागत में भी अधिक उत्पादन ले सकते हैं। इस ब्लॉग में हम गेहूँ की खेती का स्टेप-बाय-स्टेप पूरा तरीका बताएँगे—बीज, मिट्टी, खाद, सिंचाई, रोग नियंत्रण और कटाई तक।

⭐ 1. गेहूँ की खेती के लिए सही जलवायु

  • गेहूँ ठंडी जलवायु में अच्छी होती है क्योंकि यह रबी की फसल है।
  • तापमान: 15°C – 25°C
  • कटाई के समय तापमान 25°C – 30°C
  • हल्की सर्दी + सूखी हवाएँ = अधिक उत्पादन

⭐ 2. गेहूँ के लिए सही मिट्टी

दोमट (Loam) और चिकनी दोमट मिट्टी सबसे बेहतर होती है।

PH: 6.5 – 7.5

मिट्टी में जैविक पदार्थ अधिक होना चाहिए।

👉 टिप: बुवाई से पहले मिट्टी की जांच (Soil Testing) ज़रूर करें।इससे मिट्टी में जो भी कमियां वह पता चल जाएगी जिससे हम उसके अनुसार खाद दे सकते है।

⭐ 3. भूमि की तैयारी (Land Preparation)

  • खेत को 2–3 बार जुताई करें।
  • पाटा चलाकर खेत समतल करें।
  • खेत में खरपतवार बिल्कुल न रहने दें।
  • खेत में नमी बनी रहनी चाहिये।

⭐ 4. गेहूँ के लिए उपयुक्त किस्में (Best Wheat Varieties)

भारत में लोकप्रिय उन्नत किस्में:

  • HD 2967 – उच्च पैदावार
  • HD 3086 – रोग प्रतिरोधी
  • PBW 550 – हरियाणा-पंजाब में लोकप्रिय
  • HI 1544 – सूखा सहनशील
  • GW 322 – गुजरात के लिए

अपने Area के KVK (कृषि विज्ञान केंद्र) से संपर्क करके उन्नत किस्मों का उपयोग करे।

⭐ 5. बीज उपचार (Seed Treatment) – अनिवार्य

बीज उपचार इसलिए करते है जिससे यदि उसमे किसी प्रकार का कोई virus 🦠 या Fungus 🍄‍🟫 है तो वह नष्ट हो जाए।

बीज उपचार से रोग कम लगते हैं और अंकुरण अच्छा होता है।

बीज उपचार कैसे करें?
  • कार्बेन्डाजिम + थायरम 2–3 ग्राम प्रति किलो बीज। अथवा
  • नीम तेल / ट्राइकोडर्मा भी उपयोग कर सकते हैं।

⭐ 6. बीज की मात्रा (Seed Rate)

खेती का तरीकाबीज मात्रा(kg/ha)
सामान्य बुवाई100–125
ड्रिल से बुवाई80–100
देर से बुवाई125–150

यह एक सामान्य मात्रा है बाकी hybrid seed का seed rate अलग होता है। बुवाई की विधियों पर भी seed rate का असर पड़ता है।जैसे — SRI system,

⭐ 7. बुवाई का सही समय

  • उत्तरी भारत: 15 अक्टूबर – 15 नवंबर
  • मध्य भारत: 1 नवंबर – 30 नवंबर
  • देर बुवाई: 15 दिसंबर तक

⭐ 8. बुवाई का तरीका (Sowing Method)

सामान्य तौर पर हम broadcasting (छिड़कबा) विधि से करते है। लेकिन अच्छी उपज के लिए ये तरीके आजमा सकते है।

  • लाइन से बुवाई: 20–22 सेमी दूरी
  • बीज की गहराई: 4–5 सेमी
  • सीड ड्रिल (बुवाई सबसे बेहतर)

⭐ 9. खाद एवं उर्वरक प्रबंधन (Fertilizer Guide)

गेहूँ के लिए NPK की उचित मात्रा:

  • नाइट्रोजन (N): 120 kg/ha
  • फॉस्फोरस (P): 60 kg/ha
  • पोटाश (K): 40 kg/ha
खाद कब दें?
  • बुवाई के समय: कुल खाद का 50% N + पूरा P + पूरा K
  • पहली सिंचाई: 25% नाइट्रोजन
  • दूसरी सिंचाई: 25% नाइट्रोजन

नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए हम यूरिया का उपयोग करते है ।(46% N)

फास्फोरस के लिए हम D.A.P. का उपयोग करते है। (Nitrogen 18%, phosphoras 48%)

⭐ 10. सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Schedule)

सिंचाई नंबर कब करें फसल के लिए क्यों जरूरी
1st20–25 दिन बादटिलरिंग बढ़ती है
2nd40–45 दिनगाँठ बनना
3rd60–65 दिनबालियाँ निकलना
4th80–85 दिनदाना भरना

सामान्य तौर पर गेहूं में 6 सिंचाई की जाती है मगर यदि पानी कम मात्रा में उपलब्ध हो तो पहली और तीसरी सिंचाई जरूर करे।

⭐ 11. खरपतवार नियंत्रण (Weed Control)

हमारे खेती में खरपतवार एक बहुत बड़ी समस्या है। खरपतवार से उत्पादन 30% तक घट जाता है।

बुवाई के 25–30 दिन बाद:
  • 2,4-D – 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर
  • मेट्रिब्यूजिन – प्रारंभिक अवस्था में

⭐ 13. कटाई और भंडारण (Harvest & Storage)

  • जब दाना कठोर और नाखून से न दबे तब फसल काटने योग्य हो जाती है।
  • गेहूं को काटने के लिए हाथ से काटकर मशीन में डाले या फिर कटाई मशीन (Combine Harvester) से करें।
  • अनाज की नमी 12% से कम होनी चाहिए।
  • गेहूं के भंडार वाली जगह में नीम की पत्तियाँ डालें।

⭐ 14. एक एकड़ गेहूँ की लागत और मुनाफ़ा (Approx)

खर्चाराशि
बीज₹2,500 – 3,000
खाद₹4,000 – 5,000
सिंचाई₹2,000 – 3,000
मजदूरी₹2,000
कुल लागत₹10,000 – 12,000

👉 एक एकड़ उत्पादन: 18–22 क्विंटल
👉 मुनाफ़ा: ₹25,000 – 32,000 (राज्य अनुसार)

यह डाटा अनुमानित है।

⭐ निष्कर्ष

अगर किसान सही किस्म, समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, और उर्वरक प्रबंधन करें तो गेहूँ की पैदावार 30–40% तक बढ़ सकती है। यह गाइड किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन लेने में मदद करेगी।

यदि आपका किसी भी तरह का कोई question है तो comment में लिख दे उसका जवाब आपको कुछ समय में मिल जाएगा।

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