नमस्कार,
जैसा कि आप जानते ही है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े धान उत्पादक देशों में शामिल है। लेकिन फिर भी कई किसान धान की खेती में ऐसी गलतियाँ कर देते हैं जिनसे पैदावार 20–40% तक कम हो जाती है। इन गलतियों को पहचानकर और सही प्रबंधन अपनाकर किसान कम लागत में ज्यादा उत्पादन हासिल कर सकते हैं।
नीचे हम धान की खेती में होने वाली 10 सबसे आम गलतियों के बारे में विस्तार से जानेंगे — साथ ही जानेंगे कि इन्हें कैसे सुधारा जा सकता है।
✅ 1. खेत की सही तैयारी न करना
धान की अच्छी पैदावार की शुरुआत खेत की सही तैयारी से होती है। लेकिन अधिकतर किसान:
- बिना मिट्टी परीक्षण के उर्वरक डाल देते हैं जो कम या ज्यादा हो सकता है।
- खेत को समतल नहीं करते जिससे पानी कही कम या ज्यादा होता है।
- खरपतवार बचे रह जाते हैं जो फसल को बाद में नुकसान पहुंचाते है।
👉 गलती का सीधा नुकसान:
- पौधे असमान बढ़ते हैं, कही ज्यादा पौधे कही कम ।
- सिंचाई में पानी का नुकसान।
- पोषक तत्वों का असमान वितरण।
- पौधों में कमजोरी और रोग बढ़ते हैं।
✔ समाधान:
- खेत को पूरी तरह लेजर लेवलर से समतल करें।
- मिट्टी परीक्षण करवाकर NPK, pH और जिंक-सल्फर का पता लगाएँ।
ये भी पढ़ें 👉 मिट्टी परीक्षण कैसे करें 🌱
- खेत जुताई के बाद हल्की सिंचाई करें जिससे खरपतवार नष्ट हों।
- खेत की मिट्टी भुरभुरी और नरम रखें।
✅ 2. गलत समय पर बुवाई/रोपाई करना
धान(paddy)समय पर बोने वाली फसल है। देर से रोपाई करने पर:
- पौधे कमजोर रहते हैं।
- कीट व रोग अधिक लगते हैं।
- उत्पादन घट जाता है।
✔ आदर्श समय:
- उत्तर भारत: जून आख़िरी से जुलाई मध्य
- दक्षिण भारत: मई–जुलाई (क्षेत्र के अनुसार)
- पूर्वी भारत: जून–जुलाई
अगर बारिश देर से आए तो कम अवधि वाली किस्में लगाएँ जैसे 140–150 दिन वाली किस्में।
✅ 3. पानी का लगातार भराव रखना
कई किसान सोचते हैं कि धान में हमेशा भरपूर पानी चाहिए — यही सबसे बड़ी गलती है।
👉 नुकसान:
- जड़ें सड़ने लगती हैं।
- पोषक तत्व अवशोषण कम होता है।
- तना छेदक और पत्ती झुलसा जैसे रोग बढ़ते हैं।
- मिट्टी कड़ी हो जाती है।
✔ समाधान: AWD तकनीक अपनाएँ
AWD (Alternate Wetting and Drying) का मतलब है जमीन को एक बार गीला और फिर सूखा रखना।
- खेत में 2–3 सेमी पानी रहे।
- जब पानी गायब हो जाए और मिट्टी में दरार दिखे, तब ही पानी दें।
- इससे 20–30% पानी बचता है और उत्पादन बढ़ता है।
✅ 4. बीज उपचार न करना
बिना बीज उपचार के धान बोना, रोगों को न्यौता देना है।
👉 नुकसान:
- फफूंद
- झुलसा
- कीट/मक्खी
- कमजोर अंकुरण होना
✔ सही बीज उपचार:
- फफूंदनाशक: कार्बेन्डाजिम + थायोफेनेट
- जैविक उपचार: Trichoderma @ 5–10 ग्राम/किलो बीज
- नमक घोल परीक्षण: हल्के और खराब बीज अलग हो जाते हैं।
इससे अंकुरण 15–20% तक बढ़ जाता है।
✅ 5. नर्सरी की गलत देखभाल
धान की पूरी फसल का 70% तक नर्सरी की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।
किसानों की आम गलतियाँ:
- बहुत ज्यादा बीज डाल देना
- पोषण की कमी
- नर्सरी में खड़े पानी का भरा रहना
- पौधे बहुत छोटे या बहुत बड़े होना
✔ सही तरीका:
- 1 एकड़ के लिए 5–6 किलो बीज पर्याप्त।
- 25–30 दिन की स्वस्थ नर्सरी रोपाई के लिए सबसे बढ़िया।
- बीमारी रोकने के लिए जैविक घोल का छिड़काव।
- नर्सरी में पानी सिर्फ नमी जितना रखें।
✅ 6. खरपतवार नियंत्रण में देरी करना
खरपतवार (Weeds) धान के पोषक तत्वों को 30–40% तक खा जाते हैं।
किसानों की गलतियाँ:
- देर से निराई करना
- गलत खरपतवारनाशी (herbicide)का उपयोग।
- खेत में जलभराव के कारण निराई में देरी।
✔ उपाय:
(1) पहली निराई: रोपाई के 7–10 दिन बाद
(2) दूसरी निराई: 20–25 दिन बाद
(3) खरपतवारनाशी(Herbicide) सही समय पर — जैसे
- Butachlor
- Bispyribac Sodium
AWD तकनीक अपनाने से खरपतवार भी कम होते हैं।
✅ 7. उर्वरकों का गलत और असंतुलित उपयोग
कई किसान सोचते हैं कि ज्यादा यूरिया मतलब ज्यादा उत्पादन — यह गलत है। इसके बजाय एक सामान्य मात्रा में उपयोग करना चाहिए।
👉 गलत उपयोग से नुकसान:
- पौधों में सिर्फ पत्तियाँ बढ़ती है।
- झुलसा और तना छेदक बढ़ते हैं।
- पौधे गिर जाते है (लॉजिंग)
✔ सही उर्वरक प्रबंधन:
- NPK संतुलन: (N – 50%, P – 25%, K – 25%)
- जिंक सल्फेट: 10–15 किलो/एकड़
- यूरिया को 3 बार विभाजित मात्रा में दें (एक रोपाई के समय उसके बाद दूसरी और तीसरी सिंचाई के समय)
- Fertigation या deep placement तकनीक अपनाएँ।
✅ 8. कीट और रोग पहचान में गलती
कई बार किसान दवा छिड़कते हैं लेकिन समस्या कुछ और होती है।
किसान की आम गलतियाँ:
- बिना पहचान के दवा छिड़क देना
- गलत मात्रा उपयोग
- रोकथाम न करके बाद में भारी दवा डालना
✔ IPM (Integrated Pest Management) अपनाएँ:
- फसल की नियमित निगरानी
- नीम आधारित जैविक दवा
- फेरोमोन ट्रैप
- संतुलित उर्वरक
- सही समय पर कीटनाशक
✅ 9. नई तकनीक और मशीनरी का उपयोग न करना
अब भी कई किसान परंपरागत(पुराने) तरीके अपनाते हैं, जिससे:
- समय अधिक लगता है।
- श्रम लागत बढ़ती है।
- उत्पादन कम होता है।
✔ आधुनिक तकनीक अपनाएँ:
- मशीन ट्रांसप्लांटर
- ड्रोन स्प्रे
- पावर वीडर
- पावर टिलर
- सेंसर आधारित सिंचाई
इनसे लागत 25–40% तक कम हो सकती है।
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✅ 10. समय पर कटाई और मड़ाई न करना
बहुत जल्दी या ज्यादा देर से कटाई — दोनों ही नुकसान पहुंचाती हैं।
👉 जल्दी काटने से:
- दानों में नमी अधिक रहती है।
- वजन कम मिलता है।
👉 देर से काटने से:
- दाने झड़ जाते हैं।
- गुणवत्ता घटती है।
- फसल गिर जाती है।
✔ सही समय:
- जब 80–85% दाने पक जाएँ।
- नमी 20–22% हो।
- मड़ाई के बाद अनाज की नमी 12–14% रखें।
🌾 निष्कर्ष
धान की खेती में ये 10 गलतियाँ अधिकांश किसान रोज़ करते हैं। अगर किसान इन गलतियों से बचें और ऊपर बताए गए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएँ, तो उपज में आसानी से 20–40% तक बढ़ोतरी हो सकती है। कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता आज की आधुनिक खेती की जरूरत है।
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किसी भी कृषि से सम्बन्धित प्रश्न के लिए नीचे कमेंट करे,हम उत्तर देने के लिए सदैव तत्पर है।




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