नमस्कार मित्रों,
खेती में बेहतर उत्पादन और कम लागत के लिए मृदा परीक्षण (Soil Testing) बेहद जरूरी है। मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्व कम या ज्यादा हैं, किस उर्वरक की कितनी मात्रा डालनी चाहिए, pH कितना है — यह सब जानकारी सिर्फ मृदा परीक्षण से मिलती है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि मृदा परीक्षण कैसे किया जाता है, पूरा प्रोसेस क्या है और किसानों को इससे क्या-क्या फायदा होता है।
Table of Contents
मृदा परीक्षण क्या है? (What is Soil Testing?)
मृदा परीक्षण मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों (NPK, सूक्ष्म पोषक तत्व), pH, कार्बन, EC (लवणता), और बनावट को जांचने की प्रक्रिया है। इससे पता चलता है कि मिट्टी किस स्थिति में है और फसल को क्या-क्या चाहिए।
⭐ मृदा परीक्षण क्यों जरूरी है?
- सही मात्रा में उर्वरक डालने में मदद करता है।
- अनावश्यक लागत कम होती है।
- फसल उत्पादन बढ़ता है।
- मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है।
- पौधों में रोग और कमी की समस्या कम होती है।
- दीर्घकाल तक भूमि उपजाऊ रहती है।
मृदा परीक्षण कब करना चाहिए?
- फसल बोने से 1–1.5 महीने पहले।
- 2–3 साल में एक बार।
- नई भूमि पर खेती शुरू करने से पहले।
- जब फसल में पोषक तत्वों की कमी दिखाई दे।
🧪 मृदा परीक्षण कैसे करें? (Step-by-Step Process)
नीचे आपको खेत से मिट्टी का सही सैंपल लेने से लेकर लैब रिपोर्ट समझने तक का पूरा तरीका दिया गया है।
1) आवश्यक सामग्री (Tools Required)
- साफ बाल्टी या प्लास्टिक का डिब्बा
- फावड़ा/कुदाल
- कपड़ा/प्लास्टिक शीट
- मिट्टी भरने के लिए लैब बैग
- मार्कर/पेन
- खेत का नक्शा (यदि उपलब्ध हो)
2) खेत को भागों में बाँटें
यदि खेत बड़ा है, तो उसे 2–3 हिस्सों में बाँटें, क्योंकि अलग-अलग हिस्सों में मिट्टी अलग हो सकती है।
- ऊँचा भाग
- निचला भाग
- जहां पानी रुकता हो।
- जहां खाद/गोबर डाला जाता हो।
इन विशेष जगहों का सैंपल अलग से न लें। सामान्य हिस्से से ही सैंपल लें।
3) सैंपल लेने का सही तरीका
👉 गहराई (Depth)
- खरीफ/रबी फसल: 0–15 सेमी
- बागवानी: 15–30 सेमी
- गन्ना/गहरी जड़ वाली फसल: 0–30 सेमी
👉कैसे लें?
- खेत को “जिग-जैग (Zig-zag)” रूप में घूमकर 8–10 जगह से नमूने लें।
- हर जगह से लगभग ½ किलो मिट्टी निकालें।
- सारे नमूनों को साफ प्लास्टिक शीट पर मिलाएँ।
- पत्थर, जड़ें, पत्ते आदि हटा दें।
- मिश्रण से लगभग 500 ग्राम मिट्टी अंतिम नमूना के रूप में लें।
4) मिट्टी को सूखाएं (Drying Process)
- मिट्टी को छाया में सुखाएं
- धूप में न सुखाएँ (इससे रासायनिक तत्व बदल सकते हैं)
- यदि मिट्टी गीली है तो हल्का तोड़ना जरूरी है।
5) सैंपल पैक करें और लेबल लगाएँ
बैग पर साफ-साफ लिखें—
- किसान का नाम
- गाँव/खेत का नाम
- गहराई
- तारीख
- फसल का नाम (यदि जानकारी देनी हो)
6) मिट्टी को कहाँ जमा करें?
आप मिट्टी का सैंपल यहाँ दे सकते हैं—
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
- सरकारी Soil Testing Lab
- Krishi Vigyan Kendra की मोबाइल लैब
- निजी प्रमाणित लैब
- “Soil Health Card Scheme” केंद्र
📄 मृदा परीक्षण रिपोर्ट में क्या मिलता है?
रिपोर्ट में आमतौर पर यह जानकारी दी जाती है—
- pH (मिट्टी अम्लीय/क्षारीय)
- EC (लवणता)
- कार्बन %
- नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश (N, P, K)
- जिंक (Zn), आयरन (Fe), कॉपर (Cu), मैंगनीज (Mn)
- जिप्सम/चूना की जरूरत
- उर्वरक की सही मात्रा
✔ मृदा परीक्षण रिपोर्ट को कैसे समझें?
1) pH
6.5–7.5 = उत्तम
< 6 = अम्लीय
8 = क्षारीय (चूना/जिप्सम की सलाह दी जाती है)
2) NPK
LOW = उर्वरक की मात्रा बढ़ाएं
MEDIUM = सामान्य मात्रा दें
HIGH = उर्वरक कम दें या संतुलित रखें
🌱 मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक प्रबंधन
- नाइट्रोजन कम हो तो: यूरिया/नीम कोटेड यूरिया
- फास्फोरस कम हो तो: DAP/SSP
- पोटाश कम हो तो: MOP/SOP
- जिंक की कमी हो तो: जिंक सल्फेट
- सल्फर की कमी पर: बेंटोनाइट सल्फर
⚠️ मृदा परीक्षण करते समय सावधानियाँ
- भारी बारिश के बाद सैंपल न लें।
- बहुत अधिक सूखी या फटी मिट्टी का सैंपल न लें।
- गड्ढे, नाला, कूड़े वाली जगह से नमूना न लें।
- लोहे की बाल्टी का उपयोग न करें।
⭐ निष्कर्ष
मृदा परीक्षण खेती की पहली और सबसे जरूरी प्रक्रिया है। इससे किसान अपनी फसल के लिए सही पोषक तत्व जान पाते हैं, उर्वरकों की लागत बचती है और उत्पादन दोगुना तक बढ़ जाता है।
यदि हर किसान 2–3 वर्ष में एक बार मृदा परीक्षण कराए, तो मिट्टी की उर्वरता और खेती दोनों लंबे समय तक बेहतर बने रहेंगे।
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