Soil health card 2025 में सभी किसानो को बनवाना चाहिए। इससे पता चलता है कि हमारी मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है और हमें कितनी मात्रा में देने की आवश्यकता है।
(उदाहरण: यदि कोई बिना हमारी health के बारे में जाने ही दवा खिला दे तो वो हमें नुकसान करेगा उसी प्रकार मिट्टी में भी यदि हम बिना मिट्टी के health के बारे में जाने उसे दवा (खाद, उर्वरक इत्यादि) खिलाते(डालते) है तो वह नुकसान करेगा।)
भारत की कृषि व्यवस्था मिट्टी की गुणवत्ता पर सबसे ज्यादा निर्भर करती है। मिट्टी जितनी स्वस्थ होगी, फसल उतनी ही मजबूत, लागत उतनी ही कम और उत्पादन उतना ही अधिक मिलेगा। इसी के लिए सरकार ने किसानों की मदद के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण योजना शुरू की—
💡 मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card Scheme)
2025 में यह योजना पहले से कहीं अधिक डिजिटल, तेज और किसानों के लिए आसान हो चुकी है। इस ब्लॉग में हम सबकुछ A to Z जानेंगे, जैसे—
Table of Contents
🌾 Soil Health Card क्या है? (Easy Explanation)
Soil Health Card एक ऐसा दस्तावेज़ है जिसमें आपके खेत की मिट्टी का पूरा हेल्थ चेकअप लिखा होता है। मतलब उसमें पोषक की मात्रा का पूरा विवरण दिया होता है
यह कार्ड आपको बताता है—
- आपकी मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्व कितने हैं।
- कौन सी कमी है।
- कितनी खाद डालना सही होगा।
- मिट्टी का pH कितना है।
- मिट्टी में जैविक कार्बन कितना है।
यानी—👉 जैसे डॉक्टर हमारे शरीर का हेल्थ चेकअप करता है, वैसे ही Soil Health Card मिट्टी का हेल्थ चेकअप करता है।
🤔Soil health card की शुरूवात कब हुई?
✓मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरुआत 19 फरवरी 2015 को राजस्थान के सूरतगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी।
✓इसका उद्देश्य किसानों को उनके खेतों की मिट्टी की पोषक स्थिति के बारे में जानकारी देना और उचित उर्वरक उपयोग में मदद करना है।
✓श्री नरेंद्र मोदी ने योजना को “स्वस्थ धरा, खेत हरा” के नारे के साथ शुरू किया था।
⭐ 2025 में Soil Health Card योजना में क्या नया है?
सरकार इस योजना को बढ़ावा और किसानों के लिए आसान और जल्दी apply करने के लिए 2025 तक सरकार ने इस कार्ड को और बेहतर बनाया है।
नए अपडेट इस प्रकार हैं:
🚀 1. डिजिटल Soil Health Card 2025 Portal
अब किसान मोबाइल नंबर, आधार नंबर या किसान ID से अपना कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
🔍 2. QR Code आधारित कार्ड
कुछ राज्यों में कार्ड पर QR कोड मिलता है जिसे स्कैन करते ही मिट्टी की रिपोर्ट खुल जाती है।
🚛 3. मोबाइल मिट्टी परीक्षण गाड़ी (soil testing Van)
Mobile Soil Testing Van एक चलती-फिरती प्रयोगशाला गाड़ी होती है, जो गांवों और दूरदराज के इलाकों में जाकर किसानों के खेतों से मौके पर ही मिट्टी और पानी के सैंपल लेकर उनकी जांच करती है।
⚡ 4. तेज प्रोसेसिंग
नए उपकरणों की वजह से रिपोर्ट पहले से 40–50% तेज बन रही है।
🌿 5. ऑर्गेनिक फार्मिंग पैरामीटर बढ़ाए गए
अब मिट्टी का जैविक कार्बन (Organic Carbon) मुख्य पैरामीटर बन गया है। क्योंकि organic carbon पौधे के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
💡 Soil Health Card क्यों जरूरी है? (Importance)
कई किसान बिना जांच के ही यूरिया और DAP डाल देते हैं। जिससे फसल की उत्पादन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है
इससे निम्न तरीके के हानि होते है?
❌ खर्च बढ़ता है।
❌ मिट्टी की सेहत बिगड़ती है।
❌ उत्पादन कम हो जाता है।
❌ सुक्ष्म जीव (micronutrient)की कमी हो जाती है।
लेकिन Soil Health Card मिलने के बाद—
✔ 🌱 संतुलित खाद मिलती है
रिपोर्ट में बताया जाता है किन पोषक तत्वों की कितनी कमी है जिससे हम उसी के हिसाब से नाईट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश आदि की पूर्ति के लिए यूरिया, DAP, पोटाश, जिंक की उचित मात्रा डालते है।
जिससे कि ….👇
✔ 📈 उत्पादन 20–25% तक बढ़ जाता है
खाद सही मात्रा में जाएगी, तो फसल भी सही बनेगी।
✔ 💰 खर्च कम होता है
फालतू खाद डालने की जरूरत नहीं पड़ती।
✔ 🌍 मिट्टी की सेहत सुधरती है
मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।
✔ 🔬 वैज्ञानिक तरीके से खेती
आप अंदाज के बजाय वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर खेती करेंगे।ये भी पढ़ें 👉 मिट्टी परीक्षण कैसे करें?
📘 Soil Health Card में क्या-क्या जानकारी होती है?
कार्ड में कुल 12–14 पैरामीटर की रिपोर्ट दी जाती है:
🧪 1. मिट्टी का pH level
इससे पता चलता है कि मिट्टी कितनी अम्लीय या क्षारीय है। अम्लीय और क्षारीय मृदा के सुधार के लिए हम उसके सुधार के तरीके को आजमा सकते है।
7 के कम मतलब अम्लीय और 7 से ज्यादा क्षारीय होता है।
🧲 2. Electrical Conductivity (EC)
मिट्टी की विद्युत चालकता (Electrical Conductivity) से हमें मिट्टी में घुले हुए लवणों (salts) और पोषक तत्वों (nutrients) की कुल मात्रा का पता चलता है, जो यह बताता है कि मिट्टी कितनी उपजाऊ है, सिंचाई के लिए पानी की गुणवत्ता कैसी है, और पौधों को पोषक तत्व कितनी आसानी से मिल पाएंगे; यह मिट्टी के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। EC कम होने का मतलब कम लवण (रेतीली मिट्टी में), और ज़्यादा होने का मतलब ज़्यादा लवण या पोषक तत्व (क्ले वाली मिट्टी या अत्यधिक उर्वरक) हो सकता है, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।
यह आमतौर पर डेसीसीमेंस प्रति मीटर (dS/m) में मापी जाती है, और एक सही रेंज (<1 dS/m) होती है, जो बताती है कि मिट्टी में लवण कम हैं और फसल के लिए अच्छी है, जबकि उच्च EC (जैसे >4 dS/m) मिट्टी को खारी (saline) बनाती है
🌿 3. Organic Carbon (OC)
मिट्टी में organic carbon (जैविक कार्बन) की मात्रा से उसकी उर्वरता, जल धारण क्षमता, संरचना और स्वास्थ्य का पता चलता है, जो मिट्टी की पोषक तत्वों को रोकने और पौधों को भोजन व नमी प्रदान करने की क्षमता को दर्शाता है; उच्च कार्बन का मतलब बेहतर मिट्टी और अधिक पैदावार होता है, जबकि कम कार्बन कमजोर मिट्टी की निशानी है।
आमतौर पर 0.75% से ज़्यादा जैविक कार्बन को अच्छा माना जाता है, जबकि 0.5% से कम होने पर मिट्टी की उर्वरता घट जाती है।
ये भी पढ़ें 👉 कार्बनिक खेती क्या है, कैसे करे ?
⚗ 4. मुख्य पोषक तत्व (NPK)
नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), पोटाश (K) मुख्य पोषक तत्व है soil health card में देख के कितनी मात्रा कम है उसी के अनुसार urea, DAP, Potash डालना चाहिए।
💎 5. सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients)
Zinc, Iron, Copper, Manganese, Boron, Sulphur की कम या ज्यादा मात्रा को मिट्टी की स्थिति के अनुसार दर्शाता है।
📄 6. Recommended Fertilizer Dose
फसल के हिसाब से उर्वरक की मात्रा का उपयोग करे।
🧑🌾 Soil Health Card कैसे बनवाएं? | Step-by-Step Process 2025
🟩 तरीका 1: सरकारी प्रक्रिया (पूरी तरह मुफ्त)
इसमें आपको कुछ नहीं करना पड़ता। टीम खुद गांव में आती है और सैंपल लेके जाती है।
⭐ Step 1: खेत चयन (Grid Method)
ग्राम पंचायत/कृषि विभाग खेत चुनता है और सैंपल को खेत के चार से पांच अलग अलग जगह से लेता है।
⭐ Step 2: सरकारी कर्मचारी सैंपल लेते हैं
ये लोग सैंपल लेते हैं—
✓कृषि विभाग के कर्मचारी
✓कृषि वैज्ञानिक
✓Soil Testing Lab टीम
✓KVK (कृषि विज्ञान केंद्र) टीम
⭐ Step 3: सैंपल लैब में भेजा जाता है
⭐ Step 4: रिपोर्ट तैयार होती है
⭐ Step 5: आपको कार्ड मिलता है
या तो गांव में कैंप के जरिए, या ऑनलाइन डाउनलोड विकल्प मिलता है।
🟦 तरीका 2: खुद सैंपल देकर कार्ड बनवाएं
जैसा कि आप जानते ही है सरकारी काम में थोड़ा समय लगता है और यदि आपकी बारी का इंतजार नहीं करना चाहते, तो खुद भी सैंपल देकर रिपोर्ट बनवा सकते हैं।
✔ Step 1: मिट्टी का Sample लेकर पास की Soil Testing Lab में जाएं(हर जिले में 1–2 सरकारी लैब होती हैं।)
✔ Step 2: वहां फॉर्म भरें।
✔ Step 3: कर्मचारी को अपने खेत की मिट्टी का सैंपल दें।
✔ Step 4: आपकी मिट्टी का लैब के कर्मचारी जांच करते है।
✔ Step 5: आपको 7–15 दिन में कार्ड मिल जाता है।
🧪 मिट्टी का सैंपल कौन लेता है?
🟢 1. सरकारी कर्मचारी लेते हैं
✓कृषि विभाग
✓ब्लॉक स्तर की टीम
✓लैब स्टाफ
यह फ्री होता है।
🔵 2. किसान खुद भी दे सकता है
अगर जल्दी चाहिए या तुरंत जांच करवानी है तो किसान स्वयं अपने मिट्टी का सैंपल लेके लैब में दे सकता है।
🧺 मिट्टी का सही सैंपल कैसे लें? | Standard Method
सैंपल = सही रिपोर्ट
गलत सैंपल = गलत रिपोर्ट
👉सैंपल लेने का आसान तरीका:
✔ खेत को 5–6 हिस्सों में बांटें
✔ 15–20 cm गहराई की मिट्टी लें।
✔ सभी मिट्टी मिलाकर एक मिश्रण बनाएं।
✔ ½ किलो मिट्टी पॉलिथीन में भरें।
✔ नाम, गांव, खेत नंबर लिखें।
💰 Soil Health Card बनवाने की फीस
🟢 सरकारी प्रक्रिया → पूरी तरह मुफ्त 👉₹0 खर्च।
🔵 स्वयं सैंपल देकर → ₹100–₹300
कुछ प्राइवेट लैब चार्ज कर सकती हैं।
⏳ कार्ड बनने में कितना समय लगता है?
सरकारी प्रक्रिया → 15–30 दिन
प्राइवेट लैब → 5–10 दिन
📲 Online Soil Health Card डाउनलोड कैसे करें? (2025)
Step 1: Soil Health Card Portal पर जाएं
(Tap kare👉: “Soil Health Card Portal India”)
Step 2: Farmers Corner → Download SHC पर क्लिक करें
Step 3: मोबाइल / आधार नंबर डालें
Step 4: जिला और गांव चुनें
Step 5: कार्ड डाउनलोड करें
🌟 Soil Health Card के फायदे
🌱 मिट्टी का पूरा चेकअप
✔ 💧 कम पानी में अच्छी फसल होती है।
✔ 💰 खाद का खर्च कम होता है
✔ 📈 20–25% तक उत्पादन बढ़ता है।
✔ 🧪 वैज्ञानिक खेती संभव होती है।
✔ 🏞 मिट्टी की सेहत वर्षों तक ठीक रहती है।
🌻 2025 के लिए किसान सुझाव
✓हर 2 साल में मिट्टी जांच जरूर कराएं।
✓रिपोर्ट के अनुसार ही खाद डालें।
✓जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ाएं।
✓सिंचाई और उर्वरक संतुलित रखें।
✓फसल चक्र (crop rotation) अपनाएं।
🧾 निष्कर्ष (Conclusion)
2025 का Soil Health Card किसानों के लिए वरदान है।
इससे किसानों को—
👉मिट्टी की सेहत की पूरी जानकारी
👉सही खाद की सलाह
👉उत्पादन में बढ़ोतरी
👉लागत में कमी
जैसे बड़े फायदे मिलते हैं।
हर किसान को मिट्टी की जांच जरूर करवानी चाहिए, ताकि खेत लंबे समय तक उपजाऊ बना रहे।
ये भी पढ़ें 👉कम पानी में कौन सी फसल उगाए?
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Soil Health Card क्या है?
Soil Health Card एक सरकारी दस्तावेज़ है जिसमें आपकी जमीन की मिट्टी के 12–14 parameters की जानकारी होती है, जैसे pH, NPK, micronutrients आदि। इससे किसान सही fertilizer और खेती की योजना बना पाते हैं।
Soil Health Card कैसे बनता है?
इसकी प्रक्रिया में कृषि विभाग या अधिकृत लैब द्वारा खेत से मिट्टी का sample लिया जाता है, जिसे लैब में जांचकर रिपोर्ट तैयार की जाती है और Soil Health Card बनाया जाता है।
Soil Health Card बनवाने में कितना समय लगता है?
सामान्यतः मिट्टी के sample देने के 15–30 दिनों के अंदर रिपोर्ट और कार्ड जारी हो जाता है (क्षेत्र और lab load के अनुसार समय थोड़ा बदल सकता है)।
Soil sample कौन लेता है?
Sample दो तरीकों से लिए जा सकते हैं:
1. कृषि विभाग के कर्मचारी/प्रशिक्षित staff खेत पर आते हैंया
2. किसान खुद Agriculture Department/किसान सेवा केंद्र पर sample जमा कर सकते हैंSoil Health Card बनवाने के लिए क्या जरूरी है?
1. किसान का नाम
2. खेत का पता
3. जमीन का Khasra/Khatoni नंबर
4. मोबाइल नंबर
5. मिट्टी का सही तरीके से लिया गया sampleSoil Health Card बनवाने का खर्च कितना है?
अधिकतर राज्यों में यह नि:शुल्क (free) उपलब्ध कराया जाता है। कुछ निजी लैब nominal charge ले सकती हैं।
Soil Health Card कितने साल के लिए valid होता है?
Soil Health Card की validity 2 साल होती है। उसके बाद दोबारा मिट्टी की जांच करवाना बेहतर माना जाता है।
क्या Soil Health Card online download कर सकते हैं?
हाँ, कई राज्यों में आप agriculture portal पर जाकर अपना Soil Health Card report online download कर सकते हैं (राज्य के पोर्टल के अनुसार उपलब्धता बदल सकती है)
Soil Health Card के आधार पर fertilizer कैसे चुनें?
कार्ड में दिए गए nutrient level (जैसे N, P, K, S, Zn आदि) देखकर कृषि विभाग की अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरक की मात्रा तय की जाती है।




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